रमज़ान के दूसरे अशरे ‘मग़फिरत’ में कसरत से हो रही इबादत
मस्जिदों में हाथ उठा कर हुई सारी कायनात की भलाई की दुआ
हरदोई। रमज़ान के 30 दिनों का तीन अशरों में शुमार किया जाता है। एक रमज़ान से 10 रमज़ान तक रहमतों वाला अशरा रहता है। उसके बाद 11 रमज़ान से 20 रमज़ान तक मग़फिरत का अशरा कहा जाता है। इसके और तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नुम से निजात पाने का होता है। गुनाहों से माफी वाला मग़फिरत के दूसरे अशरे के जुमें के दिन और भी ज़्यादा इबादत की गई। मस्जिदों में हाथ उठा कर हर एक की भलाई और मुल्क की सलामती की दुआएं की गई।
रमज़ान के दूसरे अशरे में इबादत का सिलसिला और तेज़ हो गया है। रोज़ेदारों ने अल्लाह को याद करते हुए हर एक के गुनाहों की माफी की दुआ मांगी।शहर की जामा मस्जिद में मुफ्ती आफताब आलम ने जुमें की नमाज़ अदा कराई। इससे पहले उन्होंने रमज़ान की फज़ीलत और उसकी बरकत बयां की। कहा कि इस्लाम के पांच रुकुन,ईमान,नमाज़,रोज़ा,ज़कात और हज है। हर मोमिन को इन पांच फर्ज़ो पर हर हालत में अमल करना चाहिए।नमाज़ हर हालत में फर्ज़ है। इसके अलावा शहर की सुन्दर दाई, मोमिना बाद, चौहान थोक,व्हाइट गंज,नुमाइश पुरवा, बोर्डिंग हाउस ,अब्दुल पुरवा,सिविल लाइन,गिप्सन गंज, मंगलीपुरवा,अबरार नगर के अलावा मोहम्मदी मस्जिद में जुमें की नमाज़ अदा करने के बाद सारे नमाज़ियों ने हाथ उठा कर और गिड़गिड़ाकर दुआएं मांगी।