Trending Now

खुले तौर पर बेचे जा रहें हैं गोपनीय दस्तावेज़! रुपए दे कर हाथों हाथ मिल जाती है पोस्टमार्टम रिपोर्ट

सारा कुछ जानते हुए भी ज़िम्मेदार समेटे बैठें है अपने हाथ

हरदोई।
पोस्टमार्टम हाउस पर तैनात आउट सोर्सिंग कर्मियों की हिटलरशाही हद से ज़्यादा बढ़ती जा रही है। हर दिन उनकी कोई न कोई कारस्तानी सामने आ रही है। अब तो उन्होंने हद पार कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जोकि गोपनीय दस्तावेज़ होता है,को कमाई का ज़रिया बना लिया है।

बताते चलें कि पोस्टमार्टम हाउस जोकि शहर से बाहर होने की वजह से वहां का सारा निज़ाम बे-लगाम हो गया है। कहने को तो उसका सामना महकमें के मुखिया से हर दिन होता तो ज़रूर है। लेकिन उनका कोई खौफ नहीं। खास बात यह है कि वहां तैनात आउट सोर्सिंग कर्मियों ने अपना मज़बूत काकस कुछ इस तरह फैला रखा है। डाक्टर हों या फार्मेसिस्ट सभी उनके आगे बौने साबित हो रहें हैं। मंगलवार को ठगी किए जाने का मामला सामने आया,उसी से जुड़ा एक दूसरे मामले ने सरकारी सिस्टम की पोल खोल कर रख दी। आकांक्षा की मां मीना देवी ने बताया कि उससे पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए पांच सौ मांगें गए। रुपए देने के बाद एक कर्मी दस्तावेज़ ले कर सीएमओ दफ्तर गया, जहां से उसकी फोटोकापी करा कर थमा दी। सवाल यह उठता है कि पोस्टमार्टम हाउस में कौन,कौन सा खेल खेल रहा है,इस बारे में सभी को सब कुछ अच्छी तरह से मालूम है। एक बात बताना ज़रूरी है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तीन कापियों में तैयार की जाती है। एक काफी सम्बंधित थाना-कोतवाली,एक कापी एसपी और एक कापी सीएमओ दफ्तर बंद लिफाफे में भेजी जाती है। इस तरह गोपनीय दस्तावेज़ को बेचने वाले कितने तिकड़म बाज़ है कि अच्छे-अच्छो की उनके आगे एक भी नहीं चलती। अच्छे-अच्छे लोगों में खुद सीएमओ तक शामिल हैं। खास बात यह है कि इतना सब होने के बाद भी ज़िम्मेदारों की नज़रों में इस तरह के लोग दूध से धुले है। सीएमओ दफ्तर का अदना हो या आला,हर कोई पोस्टमार्टम हाउस में खेल करने वालों राजा हरीशचंद्र समझता है।

चोर-चोर मौसेरे भाई

चोर-चोर मौसेरे भाई वाली कहावत उस वक्त सच्ची लगने लगी,जब सीएमओ के सामने 60 हज़ार की ठगी करने की शिकायत पहुंची। सीएमओ दफ्तर का कोई भी इस बात को मानने से इंकार कर रहा था कि 60 हज़ार की ठगी की गई। लेकिन जब पहले मौजूद कुछ लोगों ने पोस्टमार्टम हाउस के कुछ आंखों देखे किस्से सुनाए,किस्से सुनने के बाद वही लोग अपना पल्ला झाड़ने लगे जो शराफत की वकालत कर रहे थे।तक कुछ लोग चोर-चोर मौसेरे भाई की कहावत को दोहराते हुए देखे गए।

बस न चले,….कान उमेंठे

पोस्टमार्टम हाउस में चल रहा खेल एक और कहावत की याद दिला रहा है। दरअसल पोस्टमार्टम हाउस में तैनात आउट सोर्सिंग कर्मियों को शक है कि सीएमओ से की गई शिकायत के मामले में घर के भेदी ने लंका ढ़हाई। पता चला है कि बुधवार सुबह होते ही आउट सोर्सिंग कर्मियों ने कई पतली गर्दन वालों पर धौंस जमाते देखे गए। कुछ ऐसे भी हैं जो वहां काम करने के बदले दाल में नमक खा रहें हैं। उनका हुक्का-पानी बंद करने का फैसला ले लिया गया और जो नमक में दाल खा रहे़ है, ज़िम्मेदार उनकी पीठ थपथपाने का काम कर रहे हैं। ऐसे में यही कहावत याद आ रही है कि….से बस न चले,गधे के कान उमेंठे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *