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आदमी वह जिसमें आदमियत हो !!

जब इंसान अपनी आँखों के बजाय दूसरें की आँखों से देखने लगे, जब इंसान अपने दिमाग की जगह दूसरें के दिमाग से सोचने लगे, और दूसरे की कही बात को बिना सोचे समझे मानने लगे, किसी द्वारा वायरल की गई खबर को बिना जाँचें सत्य मानने लगे तो समाज में नफरत फैलाना और लोगों को बांटना बहुत ही आसान हो जाता है, क्यों फिर लोग भीड़ बन जाते है और भीड़ मानवता का चीरहरण कर देती है।

कभी भाषा के नाम पर, कभी प्रान्त के नाम पर, कभी धर्म के नाम पर, कभी बीफ के नाम पर लोगों को लिंच कर दिया जाता है और हाथ तक नहीं काँपते ?
यही वहसी ! मानवता के कातिल होते हैं, कुछ इस भीड़ के साथ होते हैं तो कुछ मौन रहकर समर्थन दे रहे होते हैं, मानवता की मौत पर यह सब बराबर के भागीदार है। आज एक घटना को दूसरी घटना से जस्टीफाई करने का दौर है, इससे उन्हे ऐसा लगता है कि इस कुकर्म को अब कम करके आंका जायेगा, आज बहुत कम लोग है जो गलत को गलत कहने की हिम्मत रखते है, वरना अधिकतर तो घटना को घटना से कम्पेयर कर उस घटना को ही सही ठहरा देते हैं ।

लोगों की रात दिन की मेहनत आज उन्हे एक आशियाना नहीं दे पाती उनकी पूरा जीवन एक किराये के मकान में समाप्त हो जाता है, लेकिन इन्हे जरा भी संकोच नहीं होता लोगों के घर दुकान को आग की आहूती देने में , किसी शायर ने लिखा है कि..

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते हो बस्तियाँ जलाने में !!

कल गुरुग्राम की जिस मस्जिद पर आतंकियों ने हमला किया और नौ जवान ईमाम मुहम्मद साअद को मारडाला उसकी एक विडिओ देखी जिसमें वह एक नज्म पढ़ रहे थे…

“हिन्दू मुस्लिम बैठ के खाये थाली में ऐसा हिंदुस्तान बना दे या अल्लाह”
विडिओ देखकर दिल रो दिया, मारने वालों कभी सोचा क्या बीत रही होगी उस माँ पर जिसने अपने नौजवान और होनहार बेटे को खोया है, क्या हाल होगा उस बाप का कि बुढ़ापे में बेटे का जनाजा कांधो पर है ???

लेकिन जानवरों के पास सोचने समझने की क्षमता होती कहाँ है, कोई हिन्दू मरे या मुसलमान मरे उसके साथ उसके घर वालों के अरमान मर जाते है सपने मर जाते है सबकुछ खत्म हो जाता है , क्या सोंचते हो तुम्हारा भविष्य सुखमय बीतेगा हरगिज नहीं, यह वह बीज जो तुम बो रहे हो बहुत जल्द एक अभिषाप की शक्ल में तुम्हारे सामने होगा।

मणिपुर के हालात की खौफनाक विडिओ देख अभी मन शान्त भी नहीं हुआ था कि हर ओर से हैवानियत भरी खबरे आने लगी, जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन की वारदात दिल दहलाने वाली है क्या होगा जब रक्षक ही भक्षक बन जाये, बेचारों ने सोचा भी नहीं होगा कि जिस सफर में उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जिसे दी गई है अब मैं चैन की नींद के साथ सफर कर सकता हूँ वही इंसान उसे हमेशा की नींद दे देगा। अगर इसी तरह हर एक लोगों को मारने लगें तो देश का नागरिक किसके भरोसे घर से निकलेगा ?

समय बदलता है बदलाव प्रकृति का नियम है सुबह के बाद शाम और शाम के बाद रात और रात के बाद सुबह यही इस दुनिया का सत्य है, इंसान जन्म लेता है बाल्यावस्था से किशोरावस्था फिर युवावस्था और अंत में बुढ़ापा फिर मौत की गोद , सूरज निकलता है छिपता है मौसम बदलते है, इसलिये हर किसी को इसका ध्यान रखना चाहिये..
अपनी बुलंदियों पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए पहले भी वक़्त के कई सिकंदर रहे हैं,
जहाँ हुआ करते थे शहंशाहो के महल कभी अब वहां उनके मकबरे बने हुए हैं !!
जो इंसान समझदार है वह जानता है कि मरने के बाद इंसान के साथ सिर्फ उसकी भलाई या बुराई ही साथ जाती है जिसके आधार पर उसे पालनहार को हिसाब देना होता है, और उसके मरने के बाद दुनिया में भी लोग उसे उसकी भलाई या बुराई के साथ ही याद करते हैं, इज्जत वह नहीं जो लोग डरकर तुम्हारी इज्ज़त करें, इज्जत तो वह है कि लोग तुम्हारी पीठ के पीछे तारीफ़ की जाये ।

धर्म के नाम पर हिंसा और नफरत फैलाने वालों को धर्म की परिभाषा तक का ज्ञान नहीं होगा, लेकिन धर्म के नाम हिंसा और तोड़फोड़ आगजनी करने में सबसे आगे ?
अगर यह धर्म है तो इसकी जरूरत ही क्या हैं ?
नास्तिक फिर ठीक ही कहते हैं बिना धर्म के शान्ति से जिओ ?

असल में हमने धर्म को समझा ही नहीं है क्यों कि समझाने वालों ने ही धर्म को धंधा बना लिया है, आज समझाने वाले ही नफरते बांट रहे हैं तो समझाये कौन ?
धर्म मानवता को उसके उच्चतम शिखर पर बिठाने का नाम है, लेकिन आज धर्म के नाम पर मानवता को ही तारतार किया जा रहा है, हम सब आदम की सन्तान है इसलिये आदमी है, हम सब मनु की सन्तान है इसलिये मनुस्य है, धर्म आदमी में आदमियत पैदा करता है उसे इंसानियत का पाठ पढ़ाकर आदमी से इंसान बनाता है, जिसमें इंसानियत नहीं जिसमें मानवता नहीं उसका कोई धर्म नहीं है, जो खुदा के पैदा किये इंसानों से प्रेम नहीं कर सकता वह उस खुदा/परमेश्वर से क्या खाक प्रेम करेगा???
रोते को हसाने का नाम धर्म है।
गिरते को उठाने का नाम धर्म है।
भूखे को खाना खिलाने का नाम धर्म है।
प्यासे को पानी पिलाने का नाम धर्म है।
लोगों की हर परिस्तिथ में उनका साथ देने का नाम धर्म है।

लेखक: अब्दुर्रहमान ह्युमनिस्ट

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