आज इंसान को इंसान से जोड़ने वाले तत्व कम हैं, तोड़ने वाले अधिक हैं। इसी से आदमी आदमी से दूर हटता जा रहा है। उन्हें जोड़ने के लिए प्रेम चाहिए, करुणा चाहिए, शांति-सौहार्द चाहिए, अहिंसा चाहिए और चाहिए एक-दूसरे को समझने की वृत्ति।
गुरूग्राम की मस्जिद में दंगाईयों ने सबसे पहला निशाना 22 साल के उस नौजवान इमाम मुहम्मद साद को बनाया जिनकी कौमी एकता पर गाई नज्म आज सोसल मीडिया पर वायरल है, आज कौमी एकता की बातें उन कानों तक भला कैसे पहुँच सकती है जिनके कान नफरती बयानों से कुंद पढ़ चुके हो।
क्यों कि ये सब मानवीय गुण आज समाप्त हो गये हैं और इसी से आदमी आदमी के बीच चैड़ी खाई पैदा हो गयी है। एक का सुख दूसरे को सुहाता नहीं है, एक की उन्नति दूसरे को पसन्द नहीं है। सब अपने-अपने स्वार्थ में लिप्त हैं। एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को, एक धर्म दूसरे धर्म को, एक सम्प्रदाय दूसरे सम्प्रदाय को यहां तक कि पिता, पुत्र, भाई आदि के बीच भी वह सौमनस्य दिखाई नहीं देता, जो दिखाई देना चाहिए।
हमने अपनी किशोरावस्था में बहुत सी कहानियाँ पढ़ी और सुनी जो एकता में शक्ति का संदेश देती थी लेकिन कहानियाँ तो कहानियाँ ही होती है लोग विचार जो नहीं करते , अगर हम इतिहास उठाकर देखें तो समाज को तोड़ने वालों का परिणाम भयंकर दिखाई देता है लेकिन कहानी हो इतिहास हम कुछ नहीं समझना चाहते क्यों कि हम आज को देख रहे है हमें कल से कोई मतलब नहीं वो कल चाहे आने वाला हो या बीता हुआ, हम कभी नहीं विचार करते कि आने वाला कल हमारे बच्चों के लिये कैसा होगा ?
सोचिये जब आप सफर पर हो ट्रेन में आपको सरकार द्वारा तैनात एक सिपाही अपनी गन टांगे दिखाई दें, क्या उसे देखकर आप खुद को सुरक्षित महसूस करेगें या असुरक्षित ?
समाज में नफरत परोसने का यह काम आज मीडिया बखूबी अदा कर रहा है, यह कहना हरगिज गलत न होगा कि देश में आज जो हो रहा है उसमें सबसे एक अहम भूमिका मीडिया की भी है ।
नफरत फैलाने वाले असमाजिक तत्व तो सदा ही रहे है और उन्होने लोगों के दिलों में गलत फहमियाँ डाली और वो सफल भी हुये है।
क्यों सफल हुये ?
क्यों कि लोगों ने उनकी बातों पर आँख बंद करके विश्वास किया, सच्चाई को जानने का प्रयास नहीं किया गया , इसी के परिणाम स्वरूप आज यह हालात है, क्यों कि अगर शक पैदा हो जाये तो हसबैंड और वाइफ के बीच भी गहरी खाई पैदा हो जाती है।
हमेशा का उसूल है कि गलत फहमी और गुस्से से ही आपसी सम्बंध खराब होते है वरना गले लगकर कौन कहता है कि आज से हमारे और आपके सम्बंध खत्म?
लेखक: अब्दुर्रहमान ह्युमनिस्ट