प्रकृति ने मनुष्य की भलाई के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया प्रकृति की अपनी कोई इच्छा नहीं है, प्रकृति ने तो बस पालनहार के आदेश पर दूसरों की सेवा के खुद को समर्पित कर रखा है। इसलिये पालनहार ने उसे बाकी रखा है, जिस दिन प्रकृति नष्ट हो जायेगी मानव जीवन उससे पहले नष्ट हो जायेगा, रब का नियम है वह धरती पर उस चीज़ को बाकी रखता है जो लोगों के भले और फायदे के लिये होती है। प्रकृति की इसी विशेषता के कारण कुछ लोग उसकी पूजा तक करते हैं, आप लोगों के भले के लिये फिक्रमंद हो और लोगों के दिलों में आपके लिये सम्मान पैदा न हो, यह तो असम्भव जैसी बात है।
“जो चीज़ मनुष्यों को लाभ पहुँचाने वाली है, वह पृथ्वी पर ठहर जाती है।”
(क़ुरआन 13:17)
पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहिवसल्लम और उनके अनुयाईयों ने लोगों की भलाई के लिये और उन्हे बुराई से रोकने के लिये अपना शहर और घर-परिवार का त्याग कर दिया। पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहिवसल्लम ने शिक्षा दी कि…
“धर्म जन कल्याण, परोपकार, भलाई मानवता का नाम है।”
इसलिए यह कहा जा सकता है कि दया, प्रेम, अनुराग, करुणा व सहानुभूति की जड़ भलाई की भावना में ही है।आज दुनिया में बिगड़ते हालात का मुख्य कारण इंसान में स्वार्थ की भावना है, स्वार्थ के कारण आज नफरत बेचीं जा रहीं हैं नफरत फैलाती मीडिया को अधिक टीआरपी यानि टेलीविजन रेटिंग पॉइंट बढ़ती है फिर उस चैनल को उद्योगपति विज्ञापन देते है , और इस तरह स्वार्थ की दुनिया में नफरत फलती फूलती रहती है।
आज शान्ति और मानवता की बातें किताबी लगती है, क्यों कि आज स्वार्थी लोग अधिक है और परोपकारी बहुत कम है आज तो परोपकार और धर्म की बात भी व्यवपार बन चुकी है , आज एक सीधा साधा इंसान अपनी परेशानी को दूर करने के न जाने किधर किधर भटक कर और परेशान हो जाता है, लोग उस परेशान को उसकी परेशानी दूर करने के नाम पर ही लूट ही लेते हैं।
पिछले दिनों मैं एक जगह गया वहाँ मुझे एक अच्छी पढ़ी लिखी ग्रेजुएट लड़की काफी परेशान सी किसी को ढूड़ सी रही थी , मैं उसके पास गया बोला बेटा क्या बात है , कहने लगी फलाने साहब कहाँ है ताबीज लेना है , मेरी माँ को कैंसर हैं इलाज चल रहा है लेकिन फायदा नहीं हो रहा, मैने कहा कि बेटा तुम मेरी बेटी जैसी हो मैं तुम्हारा भला चाहता हूँ तुम खुद क्यों नहीं अपनी माँ के लिये दुआ करती , वह बोली मुझे कुछ नहीं मालुम मुझे कुछ नहीं आता कैसे करूँ, मैने उसे कुरआन की पहली सूरह याद करवाई और एक दो दुआ और उनके अर्थ बतलाये और सिखलाये और कहाँ कि अल्लाह के इन नामों के साथ रब से दुआ करो वह तुम्हारी दुआ कुबूल करेगा, और गरीबों को सदका/दान करो जब हम लोगों के साथ भलाई करते है तो रब हमारे साथ भी भलाई करता है, लड़की बहुत खुश हुई और चली गई कुछ दिन बाद फोन किया कि माँ की तबियत बेहतर है ।
यह इंसान की फितरत है कि जब हम उसके भले की बात करते हैं उसकी परेशानी में उसके आँसू पोछते हैं तो वह अहसान मानता है, क्यों कि जरूरत पर इंसान गधे को भी बाप बना लेता है यह बहुत पुरानी कहावत है। इसपर मैं यहाँ एक छोटी सी बात लिखना चाहूगाँ कि.
एक बार एक बादशाह ने अपने सभी दरबारियों से सवाल किया कि “बताओ सबसे जरूरी चीज क्या है?” किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ बात बतलाई लेकिन महाराज संतुष्ट न हुए, उन्होनें गुस्से में कहा “अगर एक हफ्ते में सही जवाब नहीं दिया तो तुम्हें मौत की सजा दी जायेगी” सभी दरबारी घबरा गये।
छठे दिन वे शहर से बाहर एक सख्स से मिले और अपनी परेशानी बतलाई, उसने कहा कि “ठीक है, मैं जवाब दूंगा, लेकिन मेरी एक शर्त है कि तुम मुझे मेरी चारपाई समेत दरबार में ले जाना”।
अपनी जान बचाने की खातिर वे उस सख्स को चारपाई समेत दरबार में ले जाने को तैयार हो गये। किसी सख्स को चारपाई समेत दरबार में आना सभी दरबारियों को हैरान कर गया, लेकिन पहुँचते ही उस चारपाई पर बैठे इंसान ने कहा, “महाराज ! इस दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण चीज है गरज! अपनी गरज की खातिर ये मुझे चारपाई समेत यहाँ तक ले आए” यह इस बात का प्रमाण है, इन्होने यह भी परवाह न की कि मेरा चारपाई समेत यहाँ आना आपको और क्रोधित कर सकता है।
इसलिये बिलकुल सीधी सी बात है और उम्मीद करता हूँ आप समझ भी गये होगें कि आप आपदा में अवसर तलासने वाले मत बनिये आप हमेशा लोगों के भले के लिये फिक्र मंद रहिये लोग आपको अपने सर पर बिठा लेगें, फिर अल्लाह ने तो हमें भेजा ही इसी काम के लिये है।
“तुम सर्वोत्तम गुणों वाले समूह हो तुम्हें लोगों के (भले के) लिये निकाला गया है, तुम उन्हे भलाई का आदेश देते हो और बुराई से रोकते हो।”
(क़ुरआन 3:110)
“अनाथों और निर्धनों के साथ अच्छा व्यवहार करों, और लोगों से भली और अच्छी बात कहो !!”
(क़ुरआन 2:83)
” अल्लाह के माल में से तुम उन्हें (निर्धनों को) दो, जो उसने तुम्हें दिया है। “
(क़ुरआन 24:33)
“मेरे बन्दों से कह दो कि ‘बात वही बोलो जो उत्तम हो, निश्चय ही शैतान तो उनके बीच उकसाकर फ़साद डालता रहता है। निस्संदेह शैतान मनुष्य का प्रत्यक्ष शत्रु है।”
(क़ुरआन 17’53)
“यक़ीनन अल्लाह किसी क़ौम की हालत तब तक नहीं बदलता जब तक कि वह अपने आप को न बदल ले।”
(क़ुरआन 13:11)
“वह अल्लाह ही है जो अपने बंदे पर स्पष्ट आयतें उतारता हैं, ताकि व तुम्हें अंधेरे से उजाले की ओर ले आये ।”
(क़ुरआन 57:9)
अब्दुर्रहमान ह्युमनिस्ट
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