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जलसा शोहदा-ए-इस्लाम तथा नात व मनकबत के मुशायरे का आयोजन

  • करते हैं और करेंगे सदा मिदहते-हुसैन
  • तुम को नहीं पता है अभी अज़मते-हुसैन

बाराबंकी(अबू शहमा अंसारी)। दसवीं मोहर्रम को मदरसा आलिया फुरकानिया फतेहपुर में जलसा शोहदाए-इस्लाम व नात व मनकबत के मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान मौलाना मुहम्मद साबिर कासमी ने की और निज़ामत का दायित्व नसीम अख्तर कुरैशी ने निभाया। जलसे की शुरुआत हाफिज मोहम्मद सलमान की तिलावत से हुई।
मुख्य अतिथि के रूप में मोहम्मद शाकिर बेहलमी, उपाध्यक्ष जमीयत उलमाए-हिंद जिला बाराबंकी ने शिरकत की। जलसा व मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे मौलाना मुहम्मद साबिर कासमी ने अपने बयान में कहा कि ये दस रोज़ह शोहदए-इस्लाम के जलसे हमारे हमारी इस्लाह के लिए हैं। इसलिये हमें इन जलसों में शिरकत करके फ़ैज़ हासिल करना चाहिए। उलमाए-किराम जो भी क़ुरआन और हदीस की रौशनी में बयान करते हैं उस पर अमल करना हमारी जिम्मेदारी है। मुफ्ती मुहम्मद नजीब कासमी ने कहा कि इस महीने में जहां लोग सिर्फ एक ही शहीद का जिक्र करते हैं और जानते हैं, वहीं इस्लाम का पूरा इतिहास शहीदों के खून से लाल है, इसलिए इसकी जरूरत है कि सभी शहीदों का जिक्र होना चाहिए, मुशायरे में पढ़े गए अशआर मुलाहिज़ा फरमाएं….

ये फेज़ माहे रिसालत नहीं तो फिर क्या है
खुली है चार सू एक चाँदनी सहाबा की
राही सिद्दीकी

करते हैं और करेंगे सदा मिदहते हुसैन
तुमको नहीं पता है अभी अज़मते हुसैन
अहमद सईद हर्फ़

खुल्द में जैसे भी चाहेंगे वो फल खायेंगे
पेड़ जो हैं घर में सुन्नत का लगाने वाले
नसीम अख्तर कुरैशी

ग़ैब से परवेज़ मिलती है मदद अल्लाह की,
मुश्किलों में सूरए-यासीन पढ़कर देखिए।
कारी परवेज़ यज़दानी

क़ुरआन में लिखा है कि मरते नहीं शहीद,
इससे ये साफ हो गया ज़िन्दा हुसैन हैं।
हस्सान साहिर

असहाबे मुहम्मद से जो रखते हैं अदावत,
उनको कभी जन्नत में कोई घर न मिलेगा।
महफूज़ फतेहपुरी

इसके आलावा मुतीउल्लाह हुसैनी, वसीकुर्रहमान शफक, हसीब यावर, शादाब अनवर, अतीक फ़तेहपुरी, सलमान फ़तेहपुरी, अब्दुल हादी फ़ैज़ी, हाफ़िज़ सलमान बिलाली, उस्मान राइनी और जावेद युसूफ ने भी अपना कलाम पेश किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मदरसा के प्रिंसिपल हाफिज मिस्बाहुद्दीन, सैयद आतिफ हुसैन चांद, हाजी एजाज अहमद अंसारी, मुहम्मद ज़ुबैर, हलीम उस्ताद, जावेद ठेकेदार, शेख एजाज अहमद आदि लोग उपस्थित रहे।मुशायरे का समापन मौलाना मुहम्मद साबिर कासमी की दुआ के साथ हुआ।

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