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बाराबंकी: क़ुरआन क़यामत तक के लिए हिदायत की किताब है: मौलाना अली फैसल

बाराबंकी(अबू शहमा अंसारी)। मुहर्रम की चांदरात से मजालिसे-अज़ा और मातमी जुलूस का सिलसिला जारी है। छोटे इमाम बाड़े में आयोजित मजलिस में मेरठ से आये मौलाना अली फैसल ने कहा कि क़ुर्आन अल हम्द से नास तक हिदायत का सर चश्मा है ! क़ुर्आने मजीद के 114 सूरे ता क़यामत इंसानो के लिए मशअले राह रहेगा ! क़ुर्आन की बेहुरमती बर्दाश्त नही की जायेगी। मौलाना ने स्वीडन में क़ुर्आन जलाए जाने की सख्त मज़म्मत की और ईराक़, ईरान, सऊदी अरब समेत मुस्लिम मुमालिक के क़दमो की तारीफ़ की। बड़ा इमाम बाड़ा ट्रस्ट के सदर सैय्यद हसन इब्राहीम काज़मी की ज़ेरे सदारत मजलिस में मौलाना ने मज़ीद कहा कि अहलेबैत को दुनिया भुला नही सकती है। मुहर्रम हमे सब्र, शुक्र, भाईचारगी, अख़ूवत और इत्तेहाद का दर्स देता है। कलमा पढ़ने वाले सभी इन्सान मुसलमान हैं। एक मुसलमान को दूसरे फ़िर्क़े के मुसलमान की इज़्ज़त ताज़ीम करनी चाहिए और किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए। मसायब में शहीदाने कर्बला का ज़िक्र हुआ तो अज़ादार रोने लगे। मजलिस के आखिर में क़ौमो-मिल्लत और इस्लामी वहदत के लिए दुआ कराई गई!

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