
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय ।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय ॥
क़ुदरत का आश्चर्यजनक नियम है: जो गड्ढे तुम दूसरों के लिये खोदते हो, उनमें स्वयं गिरना पड़ता है। फिर तुमने चाहे गड्ढे जानकर खोदे हों चाहे अनजाने में खोदे हों। जो कांटे तुम दूसरों के लिये बोते हो, वे तुम्हारे ही पैरों में छिदेंगे। अगर फूलों पर चलना हो तो सभी के रास्तों पर फूल बिखराना है, क्योंकि तुम्हें वही मिलेगा जो तुम दोगे।
किसी की जिंदगी लेने से ज़िंदगी न मिलती वही मिलेगा जो दोगे । जिंदगी दोगे, जिंदगी मिलेगी। जिंदगी लोगे, जिंदगी छिन जायेगी। कभी सुनसान पहाड़ो पर जाकर देखो और जोर से आवाज लगाओ, आप देखोगे कुछ क्षण बाद आपकी आवाज पलटकर आपको सुनाई देगी,
यह जीवन का अमिट सत्य है जो बोओगे वही काटोगे…
करता था सो क्यों किया,
अब कर क्यों पछिताय !
बोया पेड़ बबूल का,
आम कहाँ से खाय !!
लोगों के लिये आसानियाँ पैदा करो तो तुम्हारे रास्ते चारों तरफ से आसान होगें, तुम गालियां दो, चारों तरफ से गालियां तुम पर बरस जायेंगी। जो चाहो लो। मगर शर्त यही है कि जो दोगे वही मिलेगा ।
इतिहास हम क्यों पढ़ते हैं ?
रटने के लिये ?
जानकारी के लिये ?
नहीं, इतिहास एक शिक्षा है जो हमें सीखनी चाहिये कि जो गलतियाँ पहले के लोग करके गये वह हम न दोहराये, इतिहास में हम देखते हैं कि दूसरो को मिटाने वाले खुद मिट गये और ऐसे मिटे की उनकी कब्रे भी लापता है चंगेजखान ही को देख लो।
इसलिये अगर खुद का भला चाहते हो तो मिलजुल कर रहो, एक दूसरे का सम्मान करो हर एक की परेशानी में काम आओ इससे खुद भी सुखी रहोगे और समाज भी ।