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‘इशरत जहां: एनकाउंटर’ नामक किताब के प्रकाशन पर लगी रोक

पुणे, 25 जनवरी
‘इशरत जहां: एनकाउंटर’ नाम की किताब आज पुणे में प्रकाशित होनी थी। लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी। गंज पेठ स्थित सावित्रीबाई सांस्कृतिक सभागृह में पूर्व न्या. बीजी कोलसे पाटील, पूर्व पुलिस आइजी एस.एम. मुश्रीफ के हाथो इस किताब का प्रकाशन होनेवाला था।
इस किताब के लेखक अब्दुल वाहेद शेख हैं। यह उनकी दूसरी किताब है। इससे पहले उन्होंने ‘बेगुनाह क़ैदी’ नाम से एक किताब लिखी है।
उनकी दूसरी किताब इशरत जहां के कथित फर्जी एनकाउंटर पर थी। किताब में उन्होंने दावा किया है कि इशरत का एनकाउंटर पूरी तरह फर्जी था। और किताब में पुलिस, राजनीतिक नेताओं, गैंगस्टरों और संबंधित एन्काउंटर स्पेशालिस्ट की करतूतों का पर्दाफाश किया है।
संबधित किताब उर्दू भाषा में है। इसका पहला विमोचन समारोह 13 जनवरी को मुंबई से सटे ठाणे शहर में आयोजित किया गया था। लेकिन पुणे में इस किताब को प्रकाशित नहीं होने दिया गया।
आयोजकों ने कहा है कि पुलिस ने कार्यक्रम बंद करने के संबंध में कोई सूचना नहीं दी।
प्रारंभिक जानकारी यह है कि निर्धारित समय से एक-दो घंटे पहले पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी। सभागार का गेट बंद कर दिया गया और हॉल की ओर जाने वाले दोनों रास्तों को बंद कर दिए। तीन सौ चार सौ मीटर की दूरी से दोनो रास्ते बंद किए। पुलिस की मौजूदगी ने दर्शकों को कार्यक्रम में आने से रोक दिया।
दिलचस्प बात यह है कि 18 दिसंबर, 2022 को पुणे में मालेगांव विस्फोट मामले के आरोपी कर्नल पुरोहित की किताब का विमोचन किया गया। एक गंभीर मामले में आरोपी की किताब प्रकाशित करने पर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई। पुलिस को इसे रोकने की सूचना दी। लेकिन आयोजकों ने फैसला किया कि किताब का प्रकाशन तो होकर रहेगा। जिसके बाद पुलिस बंदोबस्त के बिच उस प्रोग्रम को होने दिया। शहर की पुलिस ने आयोजकों और कार्यक्रम स्थल को विशेष सुरक्षा दी थी। लेकिन अब्दुल वाहेद शेख द्वारा लिखित इशरत जहां को प्रकाशित नहीं होने दिया गया।
लेखक अब्दुल वाहेद की खास पहचान यह है कि वह 6/11 मुंबई ब्लास्ट केस का आरोपी थे। उन्हें 9 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया गया था। उन्होंने बेगुनाह कैदी नाम की एक किताब लिखी है जो उनकी बेगुनाही और फर्जी मुकदमे की पूरी प्रक्रिया पर टिप्पणी करती है।
अब्दुल वाहिद की मूल उर्दू किताब बेगुनाह कैदी का हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़, बंगाली संस्करण छपा हैं। किताब पर हेमोलिफ नामक एक फिल्म भी रिलीज हुई है।
(कमेंट (https://youtu.be/F3x6CclnCXM) बॉक्स में थाने में हुए विमोचन कार्यक्रम में लेखक की अपनी बात है। यूट्यूब ने हटाने से पहले डाउनलोड कर सकते हैं।)

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